आखिर क्या वजह है कि आजकल की लड़के – लड़कियां बहुत जल्दी जवान हो जा रहे हैं क्यों? वजह हैरान करने वाली

आखिर क्या वजह है कि आजकल की लड़के - लड़कियां बहुत जल्दी जवान हो जा रहे हैं क्यों? वजह हैरान करने वाली
आखिर क्या वजह है कि आजकल की लड़के - लड़कियां बहुत जल्दी जवान हो जा रहे हैं क्यों? वजह हैरान करने वाली 2

एैसी बात नही है , सबकुछ समय और परिवेश के उपर निर्भर करता है हमारे समय मे भी कम उम्र के लड़के और लड़की लोगो के बीच , एक दुसरे के प्रति आकर्षन रहता था , लेकिन परिवेश और समय लड़का लड़की की किशोर अवस्था मे एक दुसरे के ज्यादा करीब आने देता नही था लड़के बोलो या लड़की , दोनो मे आज के समय की तुलना मे उस समय कुछ ज्यादा ही ये आकर्षन वाला बात सामने लाने मे कुछ शर्म , डर वगैरह रहता था , घर परिवार मे ये सब लेकर शासन कुछ ज्यादा ही रहता था।

मुझे याद है कि मेरे पिताजी एकबार मेरे दो भैया को हाथ मे जुता लेकर दौड़े थे मारने के लिए , दौनो का कसुर था कि परीक्षा नजदीग था , फिर भी दौनो सिनेमा देखने चला गया था। आज के समय मे लड़का लड़की लोगो को बहुत ज्यादा छुट मिल गया है , अंधेरे गलि मे , किसी दोस्त के घर मे , या फिर जहां मौका मिले ” उम उम ” वाला खेल खेलना शुरु कर देते है ” मेरा तो किस्मत ही खराब है ” कि हम आज के समय पैगा नही हुए , इसलिए सोच रहा हुं कि जल्दी जल्दी इस जनम मे मुक्ति मिल जाए और फिर तुरंत नया जन्म लेकर वापस धरती मे आ जाए किशोर अवस्था से ही ” उम उम ” वाला खैल खैलने के लिए।

जिस जीव का जीवन काल जितना लम्बा होता है उतनी अवधि में ही बचपन जवानी बुढापा सब हो जाते हैं , माना किसी जीव का जीवन काल 12 वर्ष है तो उसका जन्म फिर बचपन फिर वयस्कता फिर संतति फिर वृद्धावस्था फिर मृत्यु – ये सब घटनाएं 12 साल में ही पूरी हो जाएगी।

इसी तरह पहले मनुष्य की उम्र 200 साल थी फिर 150 हुइ अब 70 -75 रह गई उस हिसाब से जवानी जल्दी आएगी , आज से 50 साल पहले लड़की को मासिक स्राव 16 -17 उम्र में शुरू होता था , अब 11 – 12 में शुरू हो जाता है।

दिन भर हर फिल्म और हर नाटक में अश्लील सीन बताए जाते हैं और मोबाइल पर सब कुछ उपलब्ध है , टी वी मोबाइल और समाज के अन्य कार्य व्यवहार से 7 – 8 साल की उमर से ही लड़के लड़की यौन सम्बन्ध के बारे में समझने लग जाते हैं और 14 – 15 तक तो यौनाचार में लिप्त होने की प्रबल इच्छा करने लग जाते हैं।

खान पान की सभी आदतें व्यवस्थाएं बदल गई है सात्विक आहार नही है , विशेष स्वादिष्ट भोज्य पदार्थ का प्रयोग प्रचलन बढ़ गया है जो राजसी गुण प्रधान है राजसी पदार्थ भोग प्रवृत्ति में वृद्धि करते हैं , मांस मदिरा गुटका आदि तामसी पदार्थ भोग मोह पैदा कर बलात्कार आदि में कम उम्र में ही प्रवृत्त कर रहें हैं आहार विचार मे तामसिकता का प्रतिशत बढ़ गया है।

जवान लड़कियाँ ग़लत संगत में क्यों पड़ती हैं?

सही और गलत मे बहुत कम अंतर होता है जवान बच्चे बड़ों के तजुरवों को पुरानी सोच समझते है जिसके कारण वे उससे बगावत करने लगते है उनके अनुसार जो फिल्मों आदि मे दिखाया जा रहा है वही सही है जो घर के लोग बता रहे है वे सब रुडिवादी है जिसके अनुसार चलना नहीं चाहिए जबकि जो नियमो के अनुसार जीवन जीते है वे ज्यादा सुखी होते है।

जवान लड़कियां सीधे -सादे लोग के साथ नहीं रहना चाहती है जो तड़क -भड़क वाला जीवन जीते है उनकी तरफ ज्यादा आकर्षित होती है उनका रहन -सहन उनके जैसा बनने की चाहत पैदा करता है उनकी उम्र उन्हे बाहरी हम उम्र लोगों को सही समझती है वे उनके जैसा बनने की तमाम कोशिश करती है उनके जीवन के अंधेरे पक्ष से वाकिफ न होने के कारण वे सदा उनके जीवन की सुंदरता को देखकर चकाचौंध हो जाती है जब उनकी आंखे खुलती है तब सब कुछ खत्म हो चुका होता है उनके पास हमेशा के लिए अंधकार का साया होता है जिसमे से निकलना मुश्किल होता है।

जीवन जीने के लिए सादा -जीवन उच्च विचार होना चाहिए लेकिन यह किसी को भाता नहीं है इसलिए वे गलत संगति मे पड़कर अपना जीवन तबाह कर लेती है।

आखिर में वो ऐसी कौन सी बात है जो लड़कियां कभी नहीं बताती, चाहे कोई कितना भी पूछ ले ?

आजकल की लड़के लड़कियां बहुत जल्दी जवान हो जा रहे हैं क्यों?

आज से कुछ सालों पहले तक इसका पूरा श्रय सिनेमा जगत को जाता रहा है।सिनेमा के माध्यम से हमारे समाज को जो दिशा दिखाई जाती है वह उसको स्वीकार करता है बिना किसी विचार के परन्तु आज के समय की बात करे तो इसका श्रय सस्ते मोबाईल और सस्ते डॉटा को जाता है।आज सभी के पास मोबाईल है और यदि दस घर में से एक के पास भी मोबाईल है तो यह उन दस घरो के बच्चों के लिए काफी है।

वह उसे अपने मन माने तरीके से इस्तेमाल करते है और यकीनन उसका दुरूपयोग अधिक होता है।अश्रलील सिनेमा उन्हे वे जानकारी दे देते है जो उनकी समझ से तो बाहर है परन्तु शारीरक तौर पर कौतुहल से भरा हुआ है उन्हे अपनी उम्र से पहले ही लड़के लड़कियों के शारीरिक सम्बन्ध का पता चल जाता है।ज्ञान कि बात बस उन्हे एक मज़े के तौर पर पता चलती है जिसके घातक परिणाम हमें देखने को मिलते है हाँ,हम कह सकते है शारीरिक तौर पर तो बाद में परन्तु मानसिक तौर पर आज के बच्चे समय से पहले जवान हो रहे है।

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